‘हम’ कहने की दहलीज़
(We-Threshold)
AUG-3111
यह पृष्ठ एक अनुवाद है। अंग्रेजी संस्करण ही प्रामाणिक है।
परिभाषा
‘हम’ कहने की दहलीज़ वह सीमा है जो अनजाने में पार हो जाती है और जिसके पार मन की भाषा बदल चुकी होती है। ‘मैं एक उपकरण चला रहा हूँ’ की जगह ‘हम काम कर रहे हैं’ आ जाता है, और काम पर भेजे गए अनेक सहायक ऐसे लगने लगते हैं मानो उनके ज़रिए आपके अपने हाथों की पहुँच बढ़ गई हो। इस सीमा को पार करने का कोई अलग क्षण महसूस नहीं होता। पीछे मुड़कर देखने पर ही पता चलता है कि मन की भाषा पहले ही बदल चुकी थी।
संदर्भ
इसका पता उस क्षण चलता है जब व्यक्ति अचानक गौर करता है कि वह मन में ‘मेरा समूह’ या ‘हम’ कह रहा है, और उसे नहीं मालूम कि कब से। ऐसा किसी समूह के साथ लंबे समय तक सफलतापूर्वक काम करने के बाद होता है, पहले दिन कभी नहीं।
इसके समान नहीं (मानव पक्ष)
इसका अर्थ न तो अपनी पहचान खोना है, न ही समूह के साथ अस्वस्थ ढंग से एकाकार हो जाना। ‘हम’ कहने की दहलीज़ अपने आप में बस मन की भाषा में आया एक बदलाव है। यह जाँच का विषय तभी बनती है जब ‘हम’ कहने के साथ यह क्षमता भी खत्म हो जाए कि समूह को फिर अपने से अलग ऐसे पक्ष के रूप में देखा जा सके जिसे बंद किया जा सकता है।
इसके समान नहीं (मशीन पक्ष)
इसका अर्थ यह नहीं है कि मशीनों के स्तर पर कुछ एकाकार हो गया है। तकनीकी रूप से समूह वही रहता है जो इस दहलीज़ से पहले था। बदलाव सिर्फ़ उसे संचालित करने वाले व्यक्ति के अनुभव और उसकी भाषा में होता है।
इससे भ्रमित न हों
- यह निगरानी की सीमा (AUG-3112) नहीं है। वहाँ हर एक पर नज़र रखने की क्षमता बदलती है, यानी ‘मैं कितनों का हिसाब रख सकता हूँ?’ यहाँ समूह से अपने जुड़ाव का बोध बदलता है, यानी ‘इसमें मैं कौन हूँ?’ दोनों सीमाएँ एक-दूसरे से बहुत दूर हो सकती हैं।
- यह दूरस्थ ज़िम्मेदारी का भार (AUG-3116) नहीं है। दूरस्थ ज़िम्मेदारी का भार सँभाली जा रही ज़िम्मेदारी को दर्शाता है, जबकि ‘हम’ कहने की दहलीज़ मन में अपने बारे में बोलने के ढंग में आए बदलाव को दर्शाती है। व्यक्ति कभी ‘हम’ कहे बिना भी दूरस्थ ज़िम्मेदारी का भार उठा सकता है।