मीट्रिक प्रस्तुति का विकास
(Metric Maturation)
AUG-2011
यह पृष्ठ एक अनुवाद है। अंग्रेजी संस्करण ही प्रामाणिक है।
परिभाषा
मीट्रिक प्रस्तुति का विकास वह प्रक्रिया है जिसमें स्थिति को संख्याओं में बताने वाला प्रोटोकॉल इस्तेमाल के साथ अपनी प्रस्तुति का प्रारूप बदलता जाता है। शुरुआत में केवल संख्याएँ होती हैं, फिर उनके साथ व्याख्या जुड़ती है और आगे चलकर संख्याओं के साथ उनके दायरे तथा संदर्भ से जुड़ी शर्तें भी दी जाती हैं।
संदर्भ
[केवल अवधारणाओं को प्रस्तुत करने वाले इस संस्करण के लिए संदर्भ वाले खंड से सत्र के अवलोकन पर आधारित एक वाक्य हटा दिया गया है। परिभाषा में कोई बदलाव नहीं किया गया है।]
इसके समान नहीं (मानव पक्ष)
इसका अर्थ यह नहीं कि शुरुआती सरल प्रारूप खराब थे। हर चरण अपने समय के लिए उपयुक्त था। मीट्रिक प्रस्तुति का विकास बढ़ती समझ की अभिव्यक्ति है, पहले के प्रारूपों पर कोई फैसला नहीं।
इसके समान नहीं (मशीन पक्ष)
इसका अर्थ यह नहीं कि मशीन अपनी मर्ज़ी से प्रारूप बदलने लगे। मीट्रिक प्रस्तुति का विकास संवाद के दौरान होता है। व्यक्ति फ़ीडबैक देता है और प्रारूप उसके अनुसार बदलता है। एकतरफ़ा बदलाव डायरेक्टिव ड्रिफ्ट (V1.0) होगा।
इससे भ्रमित न हों
- यह इमर्जेंट कैलिब्रेशन (AUG-2008) नहीं है। इमर्जेंट कैलिब्रेशन में मीट्रिक उभरते हैं। मीट्रिक प्रस्तुति का विकास होने पर उनकी प्रस्तुति बदलती है। पहला उनकी उत्पत्ति है, दूसरा उनका विकास।
- यह मीट्रिक ड्रिफ्ट (AUG-2005) नहीं है। ड्रिफ्ट में अर्थ अनचाहे बदलता है, जबकि मीट्रिक प्रस्तुति का विकास होने पर प्रस्तुति जानबूझकर बदली जाती है। पहला समस्या है, दूसरा प्रगति।