सहारा लेने की झेंप
(Crutch Shame)
AUG-XS-P1-01-007
यह पृष्ठ एक अनुवाद है। अंग्रेजी संस्करण ही प्रामाणिक है।
परिभाषा
सहारा लेने की झेंप वह शर्मिंदगी है जो मुझे भीतर ही भीतर उस क्षण महसूस होती है जब ध्यान जाता है कि मेरी अपनी सोच किस हद तक एआई के सहारे चल रही है। पल भर के लिए एक असहज सवाल उठता है कि क्या सोचने का काम अब भी मैं ही कर रहा हूँ। यह सवाल सोच-विचार से नहीं, भीतर की सहज अनुभूति से उठता है।
संदर्भ
यह तब उभरती है जब अचानक अपने ही व्यवहार में दिख जाता है कि हम कितना सहारा ले रहे हैं। मसलन, अपनी ओर से कोशिश शुरू करने से पहले ही उत्तर ले लेना। ऐसा अक्सर मिलकर कोई खास तौर पर अच्छा परिणाम हासिल करने के तुरंत बाद होता है।
इसके समान नहीं (मानव पक्ष)
यह वास्तविक कमजोरी का प्रमाण नहीं है। झेंप इस बात का संकेत देती है कि सहारा कितना साफ दिखाई दे रहा है, न कि इससे अपनी सोचने की क्षमता की स्थिति का पता चलता है। अपनी क्षमता बढ़ रही है या घट रही है, इसकी जाँच अलग से और निष्पक्ष ढंग से करनी चाहिए। शर्मिंदगी को उस आकलन का आधार नहीं बनाना चाहिए।
इसके समान नहीं (मशीन पक्ष)
यह मनुष्य और एआई के जुड़कर काम करने के विरुद्ध तर्क नहीं है। इस अनुभव से यह पता नहीं चलता कि सहारा अच्छा है या बुरा। इससे केवल इतना पता चलता है कि उस सहारे का एहसास होने पर चुभन होती है।
इससे भ्रमित न हों
- यह बाद की चुप्पी (AUG-XS-P1-01-005) नहीं है। उस चुप्पी में खालीपन होता है, अपने बारे में कोई फैसला नहीं। सहारा लेने की झेंप में अपने बारे में फैसला शामिल होता है।
- यह मापन सूचकों पर निर्भरता (AUG-2007) नहीं है। वहाँ संख्याओं और मापे गए मानों पर निर्भरता की बात है। यहाँ उस भावना की बात है जो दूसरे की सोच का समग्र रूप से सहारा लेने का एहसास होने पर उठती है।